पालतू शेरनी

1936 में, इलाहाबाद (prayagraj) के कुम्भ-मेला में योगानंद जी की मुलाक़ात एक स्वामी कृष्णानन्द नामक साधु से हुई। उस स्वामी के समीप आराम करते हुए एक पालतू शेरनी देखी गई—और सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि वह शेरनी मांस नहीं खाती थी, बल्कि चावल और दूध से संतुष्ट थी! कहते हैं स्वामी ने उसे इतना आध्यात्मिक आकर्षण दिया कि वह पूरी तरह शाकाहारी हो गई—यह मांसाहार को पूर्णतः त्यागने वाली एक असामान्य घटना थी।

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